प्रदेश में तीन साल पहले तक की संपत्तियों की रजिस्ट्री की जांच होगी, इसलिए बरती जा रही है सख्ती

The registry of properties up to three years ago will be checked in the state, hence strictness is being taken.
इस खबर को शेयर करें

गोरखपुर। गोरखपुर में फर्जी स्टांप मामला खुलने के बाद रजिस्ट्री विभाग में खलबली मची हुई है। प्रदेश में तीन साल पहले तक की उन सभी संपत्तियों की रजिस्ट्री की जांच होगी, जिनमें भौतिक स्टांप का इस्तेमाल किया गया है। इसे लेकर डीआइजी स्टांप मनोज कुमार शुक्ल ने गोरखपुर मंडल के सभी उप निबंधकों की 15 और 16 अप्रैल को बैठक बुलाई है। इस बैठक में उन्हें जांच के तरीके और उस दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।

जांच के दौरान जिन भी संपत्तियों की रजिस्ट्री में भौतिक स्टांप का प्रयोग किया गया है, उन स्टांप पर दर्ज नंबर आदि की पूरी रिपोर्ट तैयार कर कोषागार कार्यालय भेजी जाएगी। वहां जांच की जाएगी कि संबंधित स्टांप ट्रेजरी से जारी हुआ है या नहीं। पूरी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी।

वहां से दिशानिर्देश जारी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यद्यपि, एआइजी स्टांप प्रदीप राणा का कहना है कि यदि किसी संपत्ति की रजिस्ट्री में फर्जी स्टांप लगे मिले तो उनकी वैधता नहीं प्रभावित होगी। यह पूरी कसरत फर्जी स्टांप के खेल में लिप्त दोषियों तक पहुंचने के लिए है, ताकि इस गिरोह को जड़ से खत्म किया जा सके।

रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गोरखपुर समेत मंडल के करीब सभी जिलों में पिछले दो साल से संपत्ति आदि की रजिस्ट्री में ई-स्टांप का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रेजरी में जो भौतिक स्टांप अभी बचे हुए हैं, उनका इस्तेमाल या तो सरकारी विभाग कर रहे है या फिर न्यायालयों में किया जा रहा है। ऐसे में यदि फर्जी स्टांप का प्रयोग हुआ भी होगा तो इसकी ज्यादा आशंका दो साल पहले हुई रजिस्ट्री में है।

पकड़े गए थे डेढ़ करोड़ के स्टांप

पिछले सप्ताह खुले फर्जी स्टांप के मामले में यूपी के गोरखपुर, देवरिया व कुशीनगर के रहने वाले आरोपितों के पास से पुलिस ने स्टांप छापने वाली मशीन, एक करोड़ 52 लाख 30 हजार रुपये के फर्जी स्टांप के साथ ही यूपी, बिहार के गैर न्यायिक स्टांप, रसीदी टिकट आदि बरामद किए थे। यही नहीं, इन आरोपितों के पास से ब्रिटिश काल के भी स्टांप का एक बंडल पाया गया था। इनमें ज्यादातर 25 पैसे, 50 पैसे के स्टांप शामिल थे।

आशंका जताई जा रही है कि जालसाजों की ओर से इनका इस्तेमाल बड़े शहरों की काफी पुरानी कीमती संपत्तियों को लेकर न्यायालयों में चलने वाले वादों को उलझाने या इनमें अपना पक्ष मजबूत करने के लिए फर्जी वसीयत बनाने में किया जाता होगा। इस मामले में अब तक आठ लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

एआइजी स्टांप प्रदीप राणा ने कहा कि शासन की ओर से तीन साल पहले तक हुई उन सभी संपत्तियों की रजिस्ट्री के जांच के आदेश हुए है जिनमें भौतिक स्टांप का प्रयोग हुआ है। यद्यपि, इनकी संख्या बहुत ज्यादा नहीं है। पहले ऐसी रजिस्ट्री की सूची तैयार की जाएगी फिर एक-एक स्टांप के नंबर जांचे जाएंगे और उसकी अलग सूची बनाई जाएगी। फिर इसे कोषागार कार्यालय को भेजा जाएगा, जिससे पता चलेगा कि संबंधित नंबरों वाले स्टांप वहां से ही जारी किए गए हैं या नहीं।