उत्तराखंड में भ्रष्टाचार की जांच झेल रहे अफसर को गन्ना मंत्री ने दी ‘मलाईदार’ पोस्टिंग

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उत्तराखंड (Uttarakhand) में सरकार बदलते-बदलते मंत्रियों के लिए भ्रष्टाचार की परिभाषा ही बदल गयी. विगत जून माह में गन्ना विकास और चीनी उद्योग मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद (Yatishwaranand) ने जिस अफसर को गंभीर आरोप और व्यापक अनियमितताओं के चलते सस्पेंड किया था. उसे जांच पूरी होने से पहले ही बहाल करके सितारगंज चीनी मिल का महाप्रबंधक बना दिया. इस फैसले से मंत्री की भूमिका तो संदिग्ध हो ही गयी है वहीं धामी सरकार पर भी आरोप लगने शुरू हो गए हैं कि वो अपने मंत्रियों पर नियंत्रण नहीं रख पा रहे हैं. गन्ना विकास व चीनी उद्योग मंत्री के इस फैसले से सरकार के खिलाफ विपक्ष को एक बड़ा मुद्दा मिल गया है.

कहानी बहुत दिलचस्प है. नादेही शुगर मिल में महाप्रबंधक रहते हुए विशेष ऑडिट में करोड़ों की गड़बड़ी के आरोपी आरके सेठ को विगत जून माह में निलंबित कर दिया गया था. इसके लिए मंत्री यतीश्वरानंद ने मीडिया में सुर्खियां बटोरने के लिए बढ़ चढ़ कर दावे किये थे कि भ्रष्ट अफसरों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जायेगा. जैसे-जैसे समय बीतता गया मंत्री के दिल में सेठ के प्रति सहानुभूति पैदा होने लगी. सूत्र बताते हैं कि मंत्री ने शासन में उन्हें बहाल करने को कह दिया. लेकिन तत्कालीन सचिव व वरिष्ठ आईएएस चंद्रेश यादव जांच पूरी होने से पहले बहाल करने को तैयार नहीं हुए, सूत्रों की मानें, जब मन की नहीं हुई तो मंत्री ने सचिव को हटवा दिया. इसके बाद पंकज पांडेय को विभाग का सचिव बनाया गया लेकिन उन्हें भी ट्रेनिंग से लौटने से पहले ही हटाकर हरबंश चुघ को यह जिम्मेदारी दी गयी.

कई दिनों से बात की चर्चा हो रही थी कि गन्ना विभाग के चर्चित अफसर आरके सेठ को बहाल करके सितारगंज चीनी मिल के महाप्रबंधक की जिम्मेदारी दी जाएगी. और आखिर चर्चा धरातल पर उत्तरी. लेकिन मंत्री का यह फैसला सरकार को असहज कर गया है.

पूर्व गन्ना सचिव चंद्रेश यादव ने इसकी जांच शुरू करवा दी थी. इसी बीच इस अफसर से विभागीय मंत्री ने संपर्क किया. मंत्री ने लिखित आदेश किया कि इस अफसर को उत्तराखंड शुगर्स में महाप्रबंधक बनाया जाए. लेकिन सचिव ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सेठ को निलंबित कर दिया. इतना ही नहीं आदेश में यह भी लिखा कि यह अफसर राजनीतिक दबाव में पोस्टिंग करवाना चाहता है.

दरअसल, नादेही चीनी मिल के मुख्य अभियंता रहे आर के सेठ के खिलाफ 2 महीने पहले कार्रवाई के आदेश दिए गए थे, इन पर 2016-18 के बीच चीनी चोरी घोटाले का आरोप था. विशेष ऑडिट रिपोर्ट में भी करोड़ों की गड़बड़ी के आरोप इन पर लगे थे. तत्कालीन गन्ना सचिव चंद्रेश यादव इस पूरे मामले की जांच कर रहे थे. विभागीय मंत्री यतीश्वरानंद ने उस वक्त तुरंत कार्रवाई कर आरके सेठ को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया था.

उनके विभाग में किसी भी भ्रष्टाचारी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा चाहे वह किसी प्राइवेट चीनी मिल में काम करता हो या फिर सरकारी पद पर तैनात हो. और चाहे वह कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न हो.

गन्ना मंत्री ने कहा कि उनके पास कोई अफसर नहीं है, इसलिए सेठ को महाप्रबंधक के पद पर लाया गया है. ताकि गन्ना विभाग में काम अच्छे से किया जा सके. जांच रिपोर्ट में आरोप साबित हुए तो कार्रवाई कर देंगे.